गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
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मशहूर शायर-ए-अहलेबैत एस.टी. वाहिद का निधन, अंजुमन फिरदौसिया कदीम ने जताया गहरा शोक

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मशहूर शायर-ए-अहलेबैत एस.टी. वाहिद का निधन, अंजुमन फिरदौसिया कदीम ने जताया गहरा शोक

लखनऊ, 6 अक्टूबर ।

मशहूर शायर-ए-अहलेबैत एवं सामाजिक कार्यकर्ता जनाब एस.टी. वाहिद साहब के निधन से साहित्यिक, सामाजिक और स्थानीय राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर है। एस.टी. वाहिद साहब केवल अपनी शायरी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने मिलनसार, खुशअखलाक और हरदिलअजीज व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते थे। वह अपने वार्ड के लोकप्रिय सभासद भी रहे और रिकॉर्ड मतों से विजय हासिल कर क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।

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उनके निधन पर अंजुमन फिरदौसिया कदीम, लखनऊ की ओर से एक ताज़ियती जलसे का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद रज़ा हुसैन रिज़वी साहब क़िबला ने की। जलसे में अंजुमन के तमाम सदस्यों ने शिरकत कर मरहूम एस.टी. वाहिद साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी सामाजिक एवं धार्मिक सेवाओं को याद किया।

जलसे में अंजुमन फिरदौसिया कदीम के पूर्व सचिव जनाब हुज़ूर आलम साहब ने कहा कि एस.टी. वहीद साहब ने हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद को अपना दायित्व समझा। उन्होंने गरीबों की सहायता के लिए एक ट्रस्ट भी बनाया था, जिसका नाम बाद में “एस.टी. वाहिद मेमोरियल” रखा गया। उन्होंने कहा कि मरहूम की यह पहल उनके नेक विचारों और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है।

मशहूर शायर-ए-अहलेबैत एस.टी. वाहिद का निधन, अंजुमन फिरदौसिया कदीम ने जताया गहरा शोक

वक्ताओं ने कहा कि एस.टी. वाहिद साहब का व्यक्तित्व केवल एक शायर तक सीमित नहीं था। वह अहलेबैत से गहरी मोहब्बत रखने वाले, खुशमिजाज, मिलनसार और लोगों के दुख-दर्द में खड़े रहने वाले इंसान थे। उनकी शायरी में भी अहलेबैत के प्रति अक़ीदत और मोहब्बत साफ दिखाई देती थी। उनके निधन से उनके चाहने वालों और क्षेत्र के लोगों में गहरा दुःख है।

जलसे में जनाब रज़ा दानिश साहब ने कहा कि वहिद भाई का इंतकाल एक बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि मरहूम आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनकी सेवाएं लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी।

इस अवसर पर जनाब इरफान अली साहब ने भी अपने विचार व्यक्त किए और मरहूम के साथ बिताए समय को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंत में अंजुमन के सदस्यों ने मरहूम के ईसाले-सवाब के लिए मजलिस आयोजित करने का निर्णय लिया। जलसे का समापन सूरह-ए-फातिहा पढ़कर मरहूम की मगफिरत और बुलंद दर्जात के लिए दुआ के साथ हुआ।

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