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सैयद सिराज अब्बास रिज़वी को मिला निस्वार्थ समाजसेवा का फल, अल्पसंख्यक आयोग के बनाए गए सदस्य

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सैयद सिराज अब्बास रिज़वी को मिला निस्वार्थ समाजसेवा का फल, अल्पसंख्यक आयोग के बनाए गए सदस्य

लखनऊ, 29 अक्टूबर।

समाज की सेवा करने का शौक धीरे-धीरे इंसान को ईश्वर के नजदीक कर देता है। जब कोई व्यक्ति दूसरों के दुख-दर्द को अपना समझकर उनकी मदद करता है, तो वह लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेता है। यह सेवा-भाव ही है, जो इंसान को इंसान के काम आने की प्रेरणा देता है और जिसे सभी धर्मों में अलग-अलग रूपों में महत्व दिया गया है। इसी सेवा-भाव की एक मिसाल उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के नवनियुक्त सदस्य सैयद सिराज अब्बास रिज़वी के रूप में सामने आती है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, सैयद सिराज अब्बास रिज़वी ने आज लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की।

सैयद सिराज अब्बास रिज़वी को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का सदस्य नामित किया गया है। इससे पहले भी उनकी नियुक्ति को लेकर खबरें सामने आई थीं, लेकिन मुख्यमंत्री से उनकी शिष्टाचार भेंट ने इस उपलब्धि को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

सेवा का भाव ही इंसान की असली पहचान

किसी व्यक्ति की लोकप्रियता केवल उसके पद, प्रतिष्ठा या आर्थिक हैसियत से नहीं बनती। लोगों के बीच उसकी पहचान इस बात से बनती है कि उसने अपने जीवन में दूसरों के लिए क्या किया, जरूरत के समय किसका साथ दिया और बिना किसी स्वार्थ के कितने लोगों की मदद की।

इंसान जब किसी जरूरतमंद की मदद करता है, तो उसके बदले में उसे हमेशा धन-दौलत या कोई पद मिले, यह जरूरी नहीं। कई बार उसे लोगों की दुआएं मिलती हैं, जो किसी भी सांसारिक पुरस्कार से कम नहीं होतीं। कुछ लोगों को उनकी नेकियों का फल इसी दुनिया में मिल जाता है, जबकि कुछ को उसका प्रतिफल आखिरत में मिलने की उम्मीद रहती है। इसलिए किसी को तत्काल परिणाम दिखाई न देने पर भी नेकी और सेवा का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।

सैयद सिराज अब्बास रिज़वी की इस उपलब्धि को भी इसी नजरिए से देखा जा सकता है। उनके सामाजिक जीवन और लोगों के बीच उनके संपर्कों के बारे में उनके परिचितों के अनुभव इस बात को समझने का अवसर देते हैं कि समाज के लिए किया गया काम व्यक्ति की पहचान को किस तरह आगे बढ़ा सकता है।

आजमगढ़ से जुड़ा है परिवार

सैयद सिराज अब्बास रिज़वी मूल रूप से आजमगढ़ से संबंध रखते हैं। उनका परिवार सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। परिवार के सदस्यों की अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रियता ने भी इस पारिवारिक पहचान को विस्तार दिया है।

उनके बड़े भाई जीशान रिज़वी पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने विभिन्न संगोष्ठियों में निजामत की, समाचार एंकर के रूप में काम किया और धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में भी अपनी भूमिका निभाई। उनके जीवन का यह पक्ष बताता है कि परिवार के सदस्य अलग-अलग माध्यमों से समाज के बीच अपनी सक्रियता बनाए रखते आए हैं।

इसी परिवार में शीबू के नाम से मशहूर उनके एक अन्य भाई का भी उल्लेख किया जाता है, जो धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी के लिए जाने जाते हैं। धार्मिक आयोजनों, अज़ादारी और ज़ियारत से जुड़े कार्यों में उनकी सक्रियता का जिक्र उनके परिचितों के बीच होता रहा है। कर्बला, ईरान और इराक जैसे पवित्र स्थलों की ज़ियारत के लिए काफिलों के आयोजन तथा हज यात्रा से जुड़े प्रयासों में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।

परिवार के इन सदस्यों की गतिविधियां यह दिखाती हैं कि सामाजिक और धार्मिक जीवन में योगदान देने के अनेक रास्ते होते हैं। कोई पत्रकारिता के माध्यम से लोगों तक पहुंचता है, कोई धार्मिक आयोजनों के जरिए और कोई जरूरतमंदों की मदद करके अपनी पहचान बनाता है।

परिवार के संस्कारों का असर

किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व के निर्माण में उसके परिवार और बचपन के संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। घर में यदि लोगों की मदद करने, जरूरतमंदों का साथ देने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माहौल हो, तो उसका असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ता है।

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सैयद सिराज अब्बास रिज़वी के परिवार के बारे में उनके परिचितों की ओर से यह बताया जाता है कि उनके वालिद भी लोगों की खिदमत और सहायता के लिए सक्रिय रहते थे। ऐसे पारिवारिक संस्कारों का प्रभाव बच्चों के जीवन पर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी व्यक्ति की उपलब्धियों का श्रेय केवल परिवार को नहीं दिया जा सकता; उसके अपने प्रयास, व्यवहार और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

सिराज अब्बास रिज़वी के लिए अल्पसंख्यक आयोग की सदस्यता एक नई जिम्मेदारी है। इस पद पर उनकी भूमिका का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि वह अल्पसंख्यक समुदायों की समस्याओं को कितनी गंभीरता से सुनते हैं, जरूरतमंदों की आवाज संबंधित अधिकारियों तक किस तरह पहुंचाते हैं और अपने दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार करते हैं।

अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी और अपेक्षाएं

उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों, हितों और उनसे जुड़ी शिकायतों के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयोग से अपेक्षा की जाती है कि वह संबंधित शिकायतों पर ध्यान दे, अधिकारों के संरक्षण से जुड़े विषयों को उठाए और समुदायों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करे।

सितंबर में घोषित नियुक्तियों के तहत पूर्व मंत्री मोहसिन रज़ा को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। उनके साथ आठ सदस्यों को भी नामित किया गया, जिनमें सैयद सिराज अब्बास रिज़वी का नाम शामिल है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, यह नियुक्ति राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के तहत की गई और आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्ष निर्धारित किया गया है। में भी आयोग के पुनर्गठन और सदस्यों के नामों का उल्लेख किया गया है।

अब इस जिम्मेदारी के साथ सिराज अब्बास रिज़वी के सामने अपने सामाजिक अनुभव को संस्थागत स्तर पर उपयोग करने का अवसर है। जनता की समस्याओं को सुनना, संबंधित विभागों तक बात पहुंचाना और शिकायतों के समाधान के लिए प्रयास करना इस पद की अहम अपेक्षाएं हैं।

पद के साथ बढ़ती है जिम्मेदारी

समाज में किसी व्यक्ति को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाइयों और शुभकामनाओं का सिलसिला स्वाभाविक है। लेकिन किसी भी सार्वजनिक पद की असली सफलता उस समय सामने आती है, जब उससे जुड़े लोगों को उसके काम का लाभ मिलने लगे। पद व्यक्ति को पहचान देता है, जबकि उसके काम उस पहचान को स्थायी बनाते हैं।

सैयद सिराज अब्बास रिज़वी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई शिष्टाचार भेंट इसी नई जिम्मेदारी के दौर की एक महत्वपूर्ण घटना है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वह अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य के रूप में अपने दायित्वों को किस तरह निभाते हैं और समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं के समाधान में कितना योगदान देते हैं।

आखिरकार, इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि उसके कारण किसी दूसरे के जीवन में आसानी आए। किसी जरूरतमंद की परेशानी कम हो, किसी पीड़ित को न्याय की उम्मीद मिले और किसी कमजोर व्यक्ति को अपनी बात रखने का सहारा मिले, तो यही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है।

सैयद सिराज अब्बास रिज़वी को मिली यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक अवसर भी है। यह अवसर है अपने सामाजिक अनुभव को व्यापक स्तर पर ले जाने का, लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का और यह साबित करने का कि समाज की सेवा का भाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि काम के माध्यम से भी दिखाई देना चाहिए।

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