HomeCITYभेदभावपूर्ण रवैया से नाराज़ हाई कोर्ट ने लगाई प्रदेश सरकार को फटकार

भेदभावपूर्ण रवैया से नाराज़ हाई कोर्ट ने लगाई प्रदेश सरकार को फटकार

लखनऊ, 30 जुलाई ।इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि एक कल्याणकारी राज्य के रूप में उसे समानता का व्यवहार करना चाहिए और एक जैसे पदों पर कार्यरत कर्मियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि कार्यकारी अभियंता मोहम्मद फिरदौस रहमानी को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) में डेपुटेशन पर जाने के लिए आवश्यक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) 10 दिनों के भीतर जारी करें। यह आदेश जस्टिस मनीष माथुर की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद फिरदौस रहमानी की याचिका पर सुनाया, जिसमें उन्होंने PWD द्वारा एनओसी न दिए जाने को चुनौती दी थी। रहमानी को NHAI में डिप्टी जनरल मैनेजर (तकनीकी) पद पर चयनित किया गया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए एनओसी देने से इनकार कर दिया कि विभाग में कार्यकारी अभियंताओं की भारी कमी है। हाई कोर्ट ने इस आधार को खारिज करते हुए कहा कि अगर विभाग में वाकई कमी है, तो फिर कार्यकारी अभियंता सुधीर कुमार भारद्वाज को डेपुटेशन की अवधि कैसे बढ़ा दी गई? कोर्ट ने इसे स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर) का उल्लंघन बताया। कोर्ट ने कहा कि रहमानी और भारद्वाज के मामले में समानता थी, ऐसे में एक को अनुमति देना और दूसरे को इनकार करना संवैधानिक रूप से मनमाना फैसला है। याचिकाकर्ता के वकील गौरव मेहरोत्रा ने तर्क दिया कि राज्य सरकार का यह भेदभावपूर्ण रवैया न केवल अनुचित है, बल्कि यह रहमानी को उनकी नई जिम्मेदारी संभालने से रोक रहा है। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए PWD को तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया, ताकि रहमानी अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।

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