मैं तो आज़ाद परिन्दा हूँ ज़माने वालों कौन कर सकता है ज़ुल्फों में गिरफतार मुझे
इश्क़ के बदले में ये साहिबे दस्तार मुझे |
मुफलिसी लेके जो आयी सरे बाज़ार मुझे |
मेरी तस्वीर को मग़रूर बताते हैं वही |
अब जो मिलते हैं तो सीने से लगा लेते हैं |
मैं हकीक़त जो बयां करता हूँ दुनिया वालों |
सब सियासत है सियासत की हैं बातें इसमे |
मैं तो आज़ाद परिन्दा हूँ ज़माने वालों |
मैने अशआर के हर सम्त लगाये हैं शजर |
बात गर हक़ हो तो बेखौफ कहा करता हूँ |
सय्यद मुस्तफा रज़ा नकवी
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