गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
विज्ञापन
ब्रेकिंग
उत्तर प्रदेश

वायु प्रदूषण के मद्देनज़र इस बार दीपावली में नहीं जलेंगे पटाखे

WhatsApp X Telegram
वायु प्रदूषण के मद्देनज़र इस बार दीपावली में नहीं जलेंगे पटाखे

वायु प्रदूषण के मद्देनज़र इस बार दीपावली में नहीं जलेंगे पटाखेलखनऊ,संवाददाता | लखनऊ सहित कई शहरों में वायु प्रदूषण के मद्देनज़र इस बार दीपावली में पटाखे जलाकर ख़ुशी का इज़हार नहीं किया जा सकेगा | ये आदेश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से दिया गया है | इन शहरों में वाराणसी, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर,नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा, कानपुर नगर, लखनऊ, मुरादाबाद, बागपत और बुलंदशहर शामिल हैं | इस आदेश के बाद लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे ने शहर के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि शहर में पटाखों की सभी दुकानें बंद कराई जाएं और जो लोग नहीं मानते हैं, उनके पटाखों को जब्त किया जाए |

अपर मुख्य सचिव ने प्रदेश सरकार द्वारा आतिशबाजी की बिक्री और प्रयोग पर एनजीटी द्वारा दिए गए आदेश का तत्काल पालन करने और दीपावली को मनाने के लिए डिजिटल/लेजर आदि की नई तकनीक का प्रयोग किए जाने को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश जारी किए हैं |

विज्ञापन

शासनादेश के मुताबिक़ न्यायालय द्वारा प्रदेश के जिन जनपदों के एयर क्वालिटी इंडेक्स का उल्लेख किया गया है, उनमें कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा व ग्रेटर नोएडा, मेरठ व हापुड़ (बहुत खराब) मुजफ्फरनगर (खराब), आगरा, वाराणसी,तथा गाजियाबाद, बागपत तथा बुलंदशहर को (गंभीर) का नाम दिया गया है |

शासन द्वारा जारी निदेर्शों में यह भी कहा गया है कि जिन जनपदों में एक्यूआई मॉडरेट या उससे बेहतर है, वहां केवल ग्रीन क्रेकर्स बेचे जाएं | एनजीटी के वर्तमान और पूर्व के निर्देशों का पालन करते हुए इनको बेचा या प्रयोग किया जाएगा | इन जनपदों में दीपावली को मनाने के लिए ग्रीन क्रैकर व डिजिटल

एव लेजर आदि की नई तकनीकी के प्रयोग को आम जन में प्रोत्साहित किया जाए |

आपको बताते चलें कि 0 और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है | सभी तरह के पटाखों के बेचने और फोड़ने पर 9-10 नवंबर की आधी रात से 30 नवंबर से 1 दिसंबर की आधी रात तक प्रतिबंध लागू कर दिया गया है | जिन जिलों में वायु गुणवत्ता सूचकांक मध्यम या बेहतर है, सिर्फ वहीं ग्रीन क्रैकर बेचे और फोड़े जा सकेंगें |

विज्ञापन
↑