गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
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पैगंबर मोहम्मद साहब के कार्टून मामले पर ईरान ने फ़्रांस को लिया अड़े हाथों

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पैगंबर मोहम्मद साहब के कार्टून मामले पर ईरान ने फ़्रांस को लिया अड़े हाथों

सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन जैसे लोगों द्वारा मुसलमानों के आखरी पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद मुस्तुफा( स.अ.व .व ) पर अभद्र पुस्तक लिखे जाने के बाद अब फ़्रांस में मोहम्मद साहब के कार्टून जलाए जाने का मुद्दा विश्व भर में गहराता जा रहा है | दुनिया भर के इस्लामिक देश अब फ्रांस के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। यही नहीं ईरान के अयातुल्लाह व सुप्रीम लीडर अली हुसैन खामनेई ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए फ़्रांस पर जमकर ज़बानी प्रहार किया है |

खामनेई ने कहा, फ्रांस सरकार की राजनीति वही है जो दुनिया के सबसे हिंसक और खतरनाक आतंकियों को संरक्षण देती है। उनका इशारा मुजाहिदीन-ए-खाल्क (एमईके) की तरफ था। एमईके का पैरिस और अन्य यूरोपीय देशों में दफ्तर है और ईरान इसे आतंकी संगठन मानता है। ये संगठन साल 1997 से 2012 तक अमेरिका की टेरर लिस्ट में शामिल था। खामनेई ने कहा, फ्रांस उन देशों में से एक था जिसने “खून के प्यासे भेड़िए” सद्दाम हुसैन को आर्थिक और अन्य मदद पहुंचाई थी।

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खामनेई ने कहा, ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सांस्कृतिक गुलामी का समर्थन करना और कैरिकेचर बनाने की आपराधिक गतिविधि का समर्थन करना एमईके और सद्दाम हुसैन को संरक्षण देने का ही दूसरा पहलू है। ये पश्चिमी संस्कृति का गंदा चेहरा है जिसे वो आधुनिक तौर-तरीकों और तकनीक का इस्तेमाल करके छिपाए रखता है। बता दें कि, इस मुद्दे के गरमाने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसका समर्थन करते हुए कहा था कि उनके देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, और वह इसका समर्थन करते हैं। जिसके बाद इस्लामिक कंट्री उनके विरोध में खड़े हो गए।

ईरान ने फ्रांस की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने फ्रांस द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया। खामनेई ने अपने संबोधन में उस मैगजीन को भद्दा करार दिया जिसमें पैगंबर मोहम्मद का कार्टून छापा गया था।

खामनेई ने इस प्रकरण पर कहा कि ये केवल फ्रांस की कला का ही पतन नहीं है, बल्कि वहां की सरकार भी इस गलत काम का समर्थन कर रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ही पैगंबर के कार्टून छापने का समर्थन कर रहे हैं। खामनेई ने कहा, फ्रांस की सरकार को पीड़ित के प्रति संवेदना जाहिर करनी चाहिए थी, लेकिन पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाना गलत था। खामनेई ने कहा, वो कहते हैं कि एक आदमी की हत्या कर दी गई। तो उसके लिए शोक और संवेदना जाहिर कीजिए लेकिन आप पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को समर्थन क्यों कर रहे हैं?

खामनेई ने इस मुद्दे पर मुस्लिमों के आक्रोश जताने का भी समर्थन किया। उन्होनें कहा, इससे पता चलता है कि वो अभी ‘जिंदा’ हैं।

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