शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026
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घर-घर सिंदूर’ पर नेहा सिंह राठौड़ का बयान, साहस और विवाद का नया अध्याय

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घर-घर सिंदूर’ पर नेहा सिंह राठौड़ का बयान, साहस और विवाद का नया अध्याय

भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ एक बार फिर अपने बेबाक बयान और साहसिक अंदाज के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने केंद्र सरकार की ‘घर-घर सिंदूर’ पहल पर तीखा हमला बोला है, जिसके तहत भारतीय जनता पार्टी ने 9 जून से देशभर में महिलाओं को मुफ्त सिंदूर वितरित करने की योजना की घोषणा की है। घर-घर सिंदूर’ पर नेहा सिंह राठौड़ का बयान, साहस और विवाद का नया अध्यायनेहा ने इस पहल को “संस्कृति का अपमान” और “चुनावी पाखंड” करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीव्र बहस छेड़ दी है, और उनके समर्थक उनकी निडरता की तारीफ कर रहे हैं, जबकि आलोचक इसे एक और विवादास्पद कदम मान रहे हैं।नेहा सिंह राठौड़, जो अपनी गायकी और राजनीतिक व्यंग्य के लिए जानी जाती हैं, ने अपने एक्स हैंडल (@nehafolksinger) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने सरकार से सवाल पूछे। उन्होंने कहा, “क्या देश की महिलाएं बीजेपी नेताओं का दिया हुआ सिंदूर लगाएंगी? क्या यह हिंदू संस्कृति और परंपरा का अपमान नहीं है? सारे धर्मगुरु चूप क्यों हैं? अंधभक्तों को सांप क्यों सूंघ गया है? क्या पवित्र सिंदूर अब बीजेपी के चुनावी स्टंट का हिस्सा बन गया है?” यह बयान 29 मई 2025 को सुबह पोस्ट किया गया और तुरंत वायरल हो गया। नेहा ने इस पहल को “लोगों को उल्लू बनाने का पाखंड” बताया और कहा कि सरकार को वास्तविक मुद्दों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।नेहा का यह बयान उनके उस जुनून को दर्शाता है, जो सच बोलने और सरकार की नीतियों की आलोचना करने में उनकी पहचान बन चुका है। उनके खिलाफ 400 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं। जिनमें से कई उनके गीतों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हैं। हाल ही में, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी इसके बावजूद, नेहा की आवाज पर कोई लगाम नहीं लगी। उन्होंने अपने बयान में कहा, “मेरी आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है, लेकिन मैं चुप नहीं रहूंगी। सवाल पूछना मेरा हक है, और मैं इसे जारी रखूंगी।”नेहा का यह रवैया उनके प्रशंसकों के लिए प्रेरणादायक है। लखनऊ की एक युवती ने कहा, “नेहा दीदी की हिम्मत काबिल-ए-तारीफ है। वह हमेशा सच बोलती हैं, चाहे कितना भी दबाव हो।” उनके गीत, जैसे ‘बिहार में का बा’, ‘यूपी में का बा’, और ‘एमपी में का बा’, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उजागर करते हैं, और उनकी लोकप्रियता युवाओं और ग्रामीण जनता में जबरदस्त है। ‘घर-घर सिंदूर’ पर उनके बयान ने एक बार फिर साबित किया कि वह सरकार के किसी भी कदम को बिना जांचे-परखे स्वीकार नहीं करतीं।हालांकि, उनके आलोचकों का कहना है कि नेहा के बयान अक्सर विवाद को जन्म देते हैं और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाते हैं।

एक स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा, “नेहा हर बात को राजनीति से जोड़ देती हैं। सिंदूर हमारी संस्कृति का हिस्सा है, और इसे बांटना गलत कैसे हो सकता है?” इसके जवाब में नेहा ने कहा, “संस्कृति का सम्मान करना चाहिए, लेकिन उसे वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करना गलत है।”नेहा सिंह राठौड़ का यह बयान न केवल उनकी निडरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह समाज में बदलाव लाने के लिए अपनी आवाज का इस्तेमाल करती रहेंगी। उनके खिलाफ दर्ज शिकायतें और मुकदमे उनके हौसले को कम नहीं कर पाए हैं। वह आज भी लखनऊ और पूरे देश में एक ऐसी आवाज के रूप में जानी जाती हैं, जो सच बोलने से नहीं डरती।

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