शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
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अंडमान में मिसाइल परीक्षण: भारत की रक्षा रणनीति को नई धार

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अंडमान में मिसाइल परीक्षण: भारत की रक्षा रणनीति को नई धार

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारत ने एक उन्नत मिसाइल परीक्षण किया, जिसने वैश्विक रक्षा समुदाय का ध्यान खींचा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह परीक्षण स्वदेशी रूप से विकसित “अग्नि-प्राइम” बैलिस्टिक मिसाइल का था, जिसकी मारक क्षमता 2000 किमी तक है। इस परीक्षण का उद्देश्य भारत की सामरिक रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और क्षेत्रीय चुनौतियों का जवाब देना था।रक्षा मंत्रालय ने इस परीक्षण की आवश्यकता के पीछे कई कारण बताए।

सबसे पहले, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ और समुद्री दबदबा भारत के लिए चिंता का विषय है। अंडमान और निकोबार द्वीप, जो मलक्का जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक रूप से स्थित हैं, भारत के लिए सामरिक महत्व रखते हैं। यहाँ मिसाइल परीक्षण न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है, बल्कि क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने का संदेश भी देता है।दूसरा, हाल के वर्षों में भारत-पाक सीमा पर तनाव और ड्रोन-आधारित हथियार तस्करी की घटनाओं ने रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित किया।

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“अग्नि-प्राइम” में उन्नत नेविगेशन सिस्टम और मल्टीपल वॉरहेड्स की क्षमता है, जो इसे पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के खतरों से निपटने में सक्षम बनाती है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति को मजबूत करती है, साथ ही जवाबी हमले की क्षमता को बढ़ाती है।परीक्षण की सफलता ने DRDO और भारतीय सेना के बीच समन्वय को उजागर किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक कदम बताया।

हालाँकि, कुछ पर्यावरणविदों ने अंडमान जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र में परीक्षण पर चिंता जताई है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि सभी पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का पालन किया गया। यह परीक्षण भारत की रक्षा नीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

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