लखनऊ। कम कीमत में महंगा सामान, भारी छूट और कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच लोगों की मेहनत की कमाई पर भारी पड़ रहा है। कहीं सस्ते सामान के नाम पर ठगी हो रही है तो कहीं पुलिस और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाया जा रहा है। व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर भेजी जा रही संदिग्ध फाइलें भी साइबर अपराध का माध्यम बन रही हैं। इन खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन, नवीन अरोरा की ओर से महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश साझा किए गए हैं।
इन संदेशों में साइबर ठगों के तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए लोगों को सावधानी बरतने और किसी भी लालच या धमकी में आकर जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी गई है।
भारी छूट का ऑफर, फिर खाते पर वार
फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 50 से 90 प्रतिशत तक छूट के आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को फर्जी वेबसाइटों और ऑनलाइन स्टोर तक पहुंचाया जाता है। भुगतान के बाद नकली सामान भेजने या सामान न पहुंचाने जैसी ठगी हो सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि खरीदारी से पहले वेबसाइट, विक्रेता, रिव्यू और संपर्क विवरण की जांच करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने और जल्द भुगतान के दबाव में आने से बचें।
‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर वसूली
साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन अथवा वीडियो कॉल करते हैं। वे किसी अपराध में नाम आने, पार्सल में अवैध सामान मिलने या बैंक खाते के दुरुपयोग का आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी देते हैं। इसके बाद जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
एडीजी के जागरूकता संदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी एजेंसियां वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करतीं और न ही इस तरह पैसे जमा कराने की मांग करती हैं। ऐसी कॉल आने पर घबराएं नहीं, किसी अनजान व्यक्ति को पैसे न भेजें और संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
एक APK फाइल से खतरे में पड़ सकती है निजी जानकारी
व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बैंक अपडेट, आधार, बिजली बिल, दस्तावेज या नौकरी के नाम पर भेजी गई संदिग्ध .apk फाइल मोबाइल में दुर्भावनापूर्ण ऐप इंस्टॉल कर सकती है। इसके जरिए अपराधी फोन में मौजूद निजी जानकारी और बैंकिंग विवरण तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।
सुरक्षा के लिए ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड करें। अनजान फाइल इंस्टॉल न करें, अनावश्यक अनुमतियां न दें और किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें। ओ टी पी, पिन, पासवर्ड और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
यदि कोई साइबर वित्तीय ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना देर किए 1930 पर कॉल करे और https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराए। संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचना दे। लेन-देन की रसीद, संदिग्ध मोबाइल नंबर, संदेश, लिंक और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। यदि गलती से संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए, तो इंटरनेट बंद कर बैंकिंग खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लें।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर ठग लोगों के लालच, डर और लापरवाही का फायदा उठाते हैं। ऐसे में थोड़ी-सी सतर्कता लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है। एडीजी नवीन अरोरा की इस पहल का उद्देश्य साइबर अपराध के नए तरीकों से लोगों को पहले ही आगाह करना और जागरूकता का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। आमजन से अपील है कि वे संदिग्ध ऑफर, फोन कॉल, लिंक और फाइलों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें तथा इन सावधानियों को अपने परिवार और परिचितों तक भी पहुंचाएं।






