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नागरिकता संशोधन क़ानून लागू करने में उत्तर प्रदेश प्रथम ,क्या इसमे भी आ सकेगा कोई प्रथम ?

ज़की भारतीय

लखनऊ, संवाददाता| नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध भले ही भारत में धरने प्रदर्शन जारी हों लेकिन गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान, जिसमे उनके द्वारा बार बार कहा गया ,नागरिकता संशोधन क़ानून हर हाल में लागू होगा और आज इस क़ानून को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश प्रदेश पहला स्थान हासिल करने में सफल हो गया |आशा है कि सरकार इसी तरह से वो भी क़ानून बनाएगी जिससे किसी महिला के साथ बलात्कार ना हो सके ,हत्याओं पर अंकुश लग सके ,देश के शिक्षित युवाओं को नौकरी मिल सके ,बे सहाराओं को सहारा मिल सके , क़ानून व्ययवस्था का राज हो सके ,निर्धन अपने बच्चों को शिक्षा प्राप्त करवा सके ,सरकारी अस्पतालों में बिना भेदभाव निर्धन लोगों का निशुल्क इलाज हो सके ,पुलिस जनता के काम आ सके ,सरकारी कर्मचारी सरकार के हाथ की कठपुतली न बन सके ,देश में शांति व्ययवस्था का राज हो सके, पुनः लोगों के मन में प्रेम का बीज डाला जा सके ,रिश्वत की जादुई शक्ति नष्ट हो सके, और अंतिम बात ये कि “सबका साथ और सबका विकास ” का नारा भाजपा स्मरण करती रहे |
बहरहाल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन क़ानून लागू करते ही राज्य के गैर मुस्लिम शरणार्थियों की सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी गई है। जिसकी रिपोर्ट में सामने आया है , उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को छोड़कर 40 हज़ार शरणार्थी निवास कर रहे हैं ,इनमें अकेले पीलीभीत में ही लगभग 30 – 35 हज़ार शरणार्थी निवास कर रहे हैं ,जब्कि प्रदेश के अन्य शहरों और ग्रामों में 5000 शरणार्थियों के रहने की पुष्टि हो सकी है | बताते चलें ,नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को शरणार्थियों की सूची तैयार करने के लिए सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिये थे और इसी आदेश के सापेक्ष प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के शरणार्थियों की पहचान करने के लिए कहा गया था। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने सरकार को शरणार्थियों की सूची सौंप दी है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को जो सूची भेजी है, उस सूची में हर शरणार्थी परिवार के साथ पड़ोसी मुल्कों में हुए अत्याचार को भी विस्तारपूर्वक लिखा गया है | जिनको अपना देश छोड़कर भारत आना पड़ा ,उसका भी कारण लिखा गया है ।
नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद पीलीभीत जिला प्रशासन ने इन शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए प्रदेश के गृह विभाग और सीएम योगी आदित्यनाथ कार्यालय को सूची भेजी है।
भले ही नागरिकता संशोधन क़ानून के विरुद्ध कुछ प्रदेशों ने अपने प्रदेश में CAA लागू ना किये जाने का फरमान जारी कर दिया है और इसके विरुद्ध विधान सभा में क़ानून भी ले आए हैं | लेकिन ये तय है कि ये क़ानून देर में ही सही लेकिन सभी प्रदेशों में लागू अवश्य होगा चाहे केंद्र सरकार को उन प्रदेशों के विरुद्ध इस क़ानून को लागू करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े |

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