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कोविड- 19 को लेकर हुए वेबिनार में स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेदिक कालेज के प्राचार्य प्रो. एस एस बेदार ने डाला प्रकाश

कोरोना वायरस से लड़ने में कारगार है आर्युवैदिक मेडिसिन

आयुष मंत्री, धर्म सिंह सैनी ने कोरोना महामारी से लड़ने वाले योद्धाओं को दिया धन्यवाद

लखनऊ ,संवाददाता | बेवीनार की श्रंखला में स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालय, मुजफ्फरनगर एवं आरोग्य भारती के तत्वाधान में आज कोविड 19 तथा आयुर्वेद अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में, विषय पर वेबिनार सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम की शुरुवात डॉ नवीन जोशी द्वारा धन्वंतरि वंदना के साथ की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेदिक कालेज के प्राचार्य प्रो. एस एस बेदार ने कोविड 19 महामारी पर प्रकाश डाला। इसी क्रम में उ.प्र. सरकार के आयुष मंत्री श्री धर्म सिंह सैनी ने कोरोना महामारी से लड़ने वाले प्रदेश के डाक्टर्स, सफाईकर्मी पैरा मेडिकल स्टाफ का धन्यवाद दिया। उन्होंने मोदी जी के नेतृत्व में लॉक डाउन का पालन करने वाली जनता की बार बार प्रशंशा
की । उन्होंने प्रदेश की जनता के लिये माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में किये जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि की आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन के साथ साथ किचन में उपलब्ध मसालों का प्रयोग, च्यवनप्राश या आँवले का मुरब्बा प्रयोग कर सकते है।
इसी क्रम में डॉ राजकमल यादव विशेष सचिव, आयुष एवं मिशन निदेशक, उ.प्र. राज्य आयुष सोसायटी, लखनऊ ने बोलते हुए कहा कि भले आयुर्वेद हजारों साल पुराना हो लेकिन शायद ही कोई ऐसा हो जिसने आयुर्वेद का प्रयोग न किया हो, चाहे वो नीम का दातुन हो या हल्दी दूध लेकिन उन सबको आधुनिक परिपेक्ष्य में विश्व के सामने रखा जाना चाहिए |
उन्होंने आयुष कवच एप के 5 लाख से अधिक लोगों द्वारा डाउनलोड किए जाने तथा देश का दूसरा सबसे लोकप्रिय हेल्थ ऐप बनाने पर देश के लोगो का धन्यवाद दिया। आयुर्वेद सस्ता एवं टिकाऊ इलाज है उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय मे इसका सामान्य जन को लाभ मिलेगा।
निदेशक आयुर्वेद प्रो डॉ एस एन सिंह ने कहा कि आज समय है जब हम आयुर्वेद को आगे ले जा सकते है, उन्होंने आयुर्वेद के ऐप आयुष कवच कोविड के लिए लगभग 3 लाख प्रेजेंटेशन के साथ लांच करने की बात कही ।इस ऐप में जनसामान्य के लिए आयुर्वेद की उपलब्धता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान की बात कही। सैफई में आयुर्वेद के काढ़े के प्रयोग से इस महामारी में सफलता का उल्लेख करते हुए प्रदेश में 12 जिलो में आयुष 64 संजीवनी वटी एवं काढ़े के प्रयोग की बात कही। उन्होंने टीम वर्क के साथ कोरोना व्याधि से लड़ने की बात कही।
डॉ अशोक वार्ष्णेय, राष्ट्रीय संगठन सचिव आरोग्य भारती ने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में आयुर्वेद का महत्व बढ़ गया है। चीन को अपने पारंपरिक चिकित्सा द्वारा कोरोना में आशातीत सफलता मिली, आने वाला वक्त हमारा है। यह अवसर चुनौतीपूर्ण है और हम खुद को स्थापित करेंगे। समाज जिस भाषा मे समझे उसे समझाना होगा। योग के समान आयुर्वेद स्वीकृत होने वाला है।
शिमला के डॉ राकेश पंडित ने बताया कि भारत की जीवन शैली विज्ञान आधारित है। उन्होंने कहा कि जो लोग घर का बना खाना खाते है ,उनका प्रतिरक्षा तंत्र बाहर का खाना खाने वालों की तुलना में अधिक मजबूत होता है। आयुर्वेद में बहुत से ऐसे पौधे है जो इम्युनिटी बढ़ाते है, जिनमें गिलोय, आमला, मुलहठी, हल्दी प्रमुख है। उन्होंने भारतीय जीवन शैली के पालन द्वारा कोरोना से लड़ने की बात कही।
आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफआयुर्वेद, नई दिल्ली की डायरेक्टर डॉ तनुजा नेसारी ने संस्थान द्वारा समय समय पर किये गए कार्यो का विवरण देते हुए कहा कि यह आयुर्वेद में जनपदोध्वंस के समान है। रसायन द्रव्य, गर्म पानी का प्रयोग, गोल्डन मिल्क की बात की। क्योकि लॉक डाउन था इसलिए भारत सरकार ने सेल्फ केयर की बात की। आयुर्वेद संजीवनी एप द्वारा डेटा एकत्र किया जा रहा है तथा लगभग 6000 वैद्यो के मतों द्वारा विचार एकत्र करके गाइड लाइन बनाई गई। उन्होंने जल्दी ही आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद में कोरोना का आयुर्वेदिक इलाज शुरू होने की बात कही। उन्होंने बताया कि कवल ,नस्य आदि वायरस को शरीर के अंदर प्रविष्ट होने से रोकते है।
डा रवि श्रीवास्तव, जबलपुर ने व्याधिक्षमत्व की बात करते हुए बिभिन्न कारणों की बात की जिनमें आहार विहार, सदवृत्त पालन, स्वस्थ वृत्त की बात करते हुए स्वर्ण प्राशन के महत्व का उल्लेख किया।
डॉ परमेश्वर अरोड़ा, चीफ कंसल्टेंट, सर गंगाराम हॉस्पिटल नई दिल्ली ने कहा कि यह वह समय है जब हम आयुर्वेद के द्वारा समाज को कुछ दे सकते है कोरोना वायरस फ्लू के वायरस की तरह है, व्यक्ति को सुरक्षा कवच का पालन करना है।मास्क, सोसल डिस्टेंशिंग के साथ साथ इम्युनिटी को बढ़ाते रहना है।
हल्दी , सेंधा नमक इलायची आदि साधारण द्रव्यों का प्रयोग करना चाहिए ताकि व्यक्ति में इम्युनिटी विकसित हो सके।प्रसिद्ध आयुर्वेद वैज्ञानिक दिल्ली के श्रीकांत गौर जी ने आयुर्वेद को सरल भाषा मे लोगों को समझा कर जन उपयोगी बनाने का उल्लेख किया।
प्रो एस एस बेदार ने कहा कि दुनिया के दूसरे देशों में अपनी बात रखने के लिए रिसर्च के साथ साथ डेटा एकत्रीकरण पर जोर दिया चाहे वह ट्रीटमेंट हो या प्रोफिलैक्सिस लेवल पर हो। और सभी वक्ताओं और श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित दिया।
कार्यक्रम के संचालक आरोग्य भारती के डॉ अतुल वार्ष्णेय ने बताया कि इस महामारी के बाद आज आयुर्वेद की दवाओं को सारा विश्व माँग रहा है। आने वाला समय आयुर्वेद का है। डॉ नवीन जोशी जी जो कि आयुष दर्पण जर्नल के चीफ संयोजक है, उन्होने बताया कि इस कार्यक्रम को फेस बुक पर 25000 से अधिक लोगो ने लाइव देखा। इस बेविनार मे डॉ रमाकांत द्विवेदी ,डॉ विभुकांत , डॉ लक्ष्मी अग्निहोत्री ,डॉ विपिन मिश्र, डॉ मीनाक्षी शुक्ल डॉ अजय ,डॉ शैलेन्द्र सहित प्रदेश और प्रदेश के बाहर के सरकारी एवम निजी महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, चिकित्सको, पैरा मेडिकल स्टाफ तथा छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भागीदारी की ।

 

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