Home Crime अपराधियों के लाख प्रयास के बावजूद नहीं टूट सकता पत्रकारिता का दर्पण

अपराधियों के लाख प्रयास के बावजूद नहीं टूट सकता पत्रकारिता का दर्पण

हमारी ज़रूरत हैं तो हमें ज़िंदा भी रक्खे सरकार

(ज़की भारतीय)

लखनऊ (सवांददाता) पत्रकार निष्पक्ष और निर्भीक होकर आने वाले समय में शायद ही समाचार को प्रकाशित कर सके, हालाँकि अपनी जान हर समय हथेली पर लेकर चलने वाला पत्रकार समाज का दर्पण है | जनता की मूलभूत समस्याओं को लेकर अपने पद का ईमानदारी से निर्वहन कर रहा है , लेकिन बिना किसी सुरक्षा के अपने पद का निर्वहन करने वाले पत्रकार को हमेशा ही समाज के भ्रष्ट अधकारियों , अपराधियों और भ्रष्ट हाईप्रोफाइल लोगों का निशाना बनना पड़ा है | जिसकी एक नहीं हज़ारों मिसाले मौजूद हैं | सत्यता बोलने पर आज रविश कुमार जैसे न जाने कितने पत्रकार ऐसे हैं जिन्हे सच्चाई का खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा हैं| लेकिन ऐसा नहीं कि पत्रकार उत्पीड़न से डरकर सत्यता दिखाना या छापना भूल गया हैं | ये अलग बात हैं कि इस समय पत्रकारों का एक बहुत बड़ा तबक़ा बिकाऊ हो गया हैं , जिसके कारण देश की जनता का पत्रकारिता पर से विश्वास उठ रहा हैं, लेकिन ईमानदार पत्रकारों के प्रति आजतक कोई सरकार गम्भीर नहीं हुई | जिसके कारण कई पत्रकारों की हत्या हो चुकी हैं, कई पत्रकारों को खुलेआम जला दिया गया | पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बहुत जल्द यूनाइटेड पत्रकार एशोसिएशन सरकार से मांग करने जा रही हैं | निहत्ते पत्रकारों को वैसे अपने क़लम और कैमरों पर खुद से अधिक यक़ीन हैं, लेकिन किस गली में, किस स्थान पर पत्रकारों को खबर का खामियाज़ा भुगतना पड़ जाये इसका अंदाज़ा किसी पत्रकार को नहीं रहता हैं, बावजूद इसके पत्रकार समाज के हित में आज भी अपना सीना तान के खड़ा हुआ हैं | आज चाहे नेता हों, न्यायपालिका हों या फिर सरकारी अधिकारी हों सभी को सुरक्षा हेतु पुलिस प्रोटेक्शन दिया जाता है , लेकिन पत्रकारों के साथ वर्षों से सौतेला बर्ताव होता आ रहा हैं | हमें भारतीय सविधान का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, लेकिन सत्यता तो ये हैं कि हम ही सबसे अहम सतम्भ हैं | अगर हम सबसे अहम स्तम्भ न होते तो सर्वोच्च न्यायलय के वरिष्ठ जजों को अपनी बात जनता तक पहुंचने के लिए हम पत्रकारों का सहारा नहीं लेना पड़ता और पत्रकार वार्ता का आयोजन भी नहीं किया गया होता | आज मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक अपने समारोह की जानकारी का निमंत्रण पत्र पत्रकारों तक नहीं भिजवाते , अपराध के मामले में पुलिस अधिकारी पत्रकारों को जानकारी नहीं देते | जब हम पत्रकार इतनी अहम भूमिका निभा रहे हैं तो आखिर सरकार हमारे साथ सौतेला बर्ताव क्यों कर रही हैं |

अभी हाल ही में उर्दू दैनिक समाचार पत्र के सम्पादक मोईद खान ने अपने समाचार पत्र “हिंदुस्तान ब्यूरो ” में नाली के एक विवाद में हुई मारपीट की खबर अपने समाचार पत्र में प्रकाशित की थी, जिससे नाराज़ होकर आपराधिक प्रवति के लोगों ने उनके निवास / कार्यालय में 15 अक्टूबर की रात हमला बोल दिया और जमकर फायरिंग की, यही नहीं कार्यालय के लोगो के साथ-साथ उनके परिवार वालों के साथ भी अभद्रता की, जिसकी मोबाईल द्धारा मोईद खान की पुत्री ने पूरी मूवी बना ली | अपराधियों के विरुद्ध वैसे तो धारा- 147, 148, 323, 504, 506,452 और 354 (खा) के तहत चौक कोतवाली में मुकदमा तो पंजीकृत हों गया लेकिन अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं | यही नहीं पत्रकार मोईद खान ने आज बताया कि उनके विरोधी धमकियां दे रहे हैं कि अगर तुमने मुकदमा वापस नहीं लिया तो तुम्हारी पुत्री का अपहरण कर लेंगे | क्योकि विरोधी पक्ष भी पत्रकार के मोहल्ले के ही निवासी हैं और नाजायज़ तथा लइसेन्सी असलहों से लैस रहते हैं, इसलिए पत्रकार मोईद खान के साथ कोई भी अप्रिय घटना हों सकती हैं | इस मामले में पत्रकार मोईद खान ने पत्रकारों से सहायता की अपेक्षा की हैं और यूनाइटेड पत्रकार एशोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसका संज्ञान लिया हैं |

यूनाइटेड पत्रकार एसोशिएसन के अध्यक्ष क़ायम रज़ा और सचिव खालिद रहमान ने इस मामले में कहा हैं कि हमारा मक़सद पत्रकारों पर हों रहे अत्याचार और उनके उत्पीड़न के विरुद्ध लड़ाई लड़ने का रहा हैं | खालिद रहमान ने कहा कि पत्रकार मोईद खान के मामले में की गई जांच से स्पष्ट होता हैं कि उनके साथ खबर लिखने को लेकर अभियुक्तों ने जानलेवा हमला करने की गरज़ से उनके घर /कार्यालय पर हमला किया और उनके परिवार सहित कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई, साथ ही अभियुक्तों ने कई चक्र गोली भी चलाई | इसलिए अभियुक्तों की गिरफ़्तारी आवश्यक हैं , यदि ऐसे अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकारों का मनोबल टूट जायेगा |

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