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ग़ौर करने की बात ,बिना दवाओं के,कैसे स्वस्थ हो रहे हैं कोविड-19 के मरीज

ज़की भारतीय

लखनऊ, संवाददाता। भारत में सुकून के दरवाजे पर जिस तरह कोरोना वायरस (कोविड -19) ने दस्तक देकर लोगों के दिलों में जो दहशत पैदा की वो दहशत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।हालांकि कोरोना वायरस कोई नया वायरस नहीं है ,लेकिन कोविड-19 नया है । संसार भर में अभी तक इसके इलाज के लिए कोई मेडिसिन नहीं बन सकी है,इसीलिए दुनिया भर में लोगों की मौत का सिलसिला जारी है और इस वायरस पर अंकुश लगाने में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (डब्लू.एच.ओ) सहित संसार का कोई भी देश अबतक सफलता नहीं पा सका है। अधिकतर कोरोना वायरस के मरीजों के लंग्स में जमा होने वाले म्यूकस को ये वायरस जमाने लगता है,जो आख़िर में सूख जाता है। म्यूकस के सूखने के बाद हलक़ में जलन होने लगती है और आवाज़ में भारी पन पैदा हो जाता है ,यही नहीं इसके बाद सास लेने में दिक़्क़त आने लगती है। इस तरह के कोरोना वायरस का इलाज संसार भर के चिकित्सकों के पास है। कोविड-19 में भी यही लक्षण होते हैं जो अन्य तरह के कोरोना वायरस में होते हैं। हालांकि कोरोना वायरस को सही करने के लिए म्यूकस का उखाड़ना बहुत ज़रूरी होता है ,इसके उखड़ने या पिघलने के बाद ही बीमार को छींकें आना शुरू होती हैं जिसके बाद नज़ला बहता है और नाक के रास्ते या फिर खांसी आने के बाद म्यूकस बाहर निकलने लगता है।जिससे मरीज़ को आराम मिलने लगता है। इस तरह के कोरोना वायरस में ज्वर भी तेज आता है शरीर कमज़ोर हो जाता है और इसका इलाज आर्युवैदिक,यूनानी और होमियोपैथी के अलावा ऐलोपैथिक में भी आसान है। अब प्रश्न ये उठता है कि अगर कोविड-19 की दवा ही नहीं बन सकी है तो उत्तर प्रदेश के 60 ज़िलों से आए 2053 कोरोना के पॉजिटिव केसों में से 462 कोरोना मरीज़ स्वस्थ होकर कैसे चले गए। या तो ये माना जाए कि जो लोग स्वस्थ हुए उनको कोविड-19 था ही नहीं या फिर ये माना जाए कि भारत के चिकित्सकों ने कोविड-19 का इलाज ढूंढ निकाला है। वरना ये कहना ग़लत नहीं होगा कि मरने वाले लोगों को कोविड-19 था ,लेकिन ठीक होने वालीं को वही पुराना कोरोना वायरस था ,जिसका भारत मे वर्षों से इलाज होता आ रहा है। क्योंकि दोनों के लक्ष्ण एक जैसे हैं। जनरल कोरोना वायरस में भी सोशल डिस्टनसिंग बनाना जरूरी होती है और इस कोविड 19 मे भी ,यही नहीं उस कोरोना वायरस में भी कोरोना प्रभावित व्यक्ति की छींक से दूर रहना आवश्यक होता है और इस कोविड-19 के मरीज की छींक से भी दूरी बनाए रखना ज़रूरी होता है। ऐसी स्थित में जब कोविड-19 का इलाज ही नहीं आया तो कैसे माना जाए कि ठीक होने वाले कोविड -19 के मरीज थे। ये सत्य है कि इस मुश्किल घड़ी में डॉक्टरर्स,पत्रकारों ,प्रशासन और सरकार की भूमिका अत्यंत सराहनीय है लेकिन ये भी सत्य है कि जब कोविड-19 का इलाज नहीं आया तो मरीज़ सही कैसे हुए ?

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