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शायरे अहलेबैत नईयर सिरसिवि सुपुर्दे ख़ाक, चारों तरफ ग़म का माहौल, एक सन्नाटा सा होगा हर्श के बाज़ार में| हम अगर कह दें हमें आंसू की क़ीमत चाहिए ||

(ज़की भारतीय )
लखनऊ, 8 सितम्बर | सिरसी की सरज़मी को पूरे विश्व में अपनी शायरी से पहचान दिलाने वाले मशहूर शायर नईयर सिरसिवि का कल रात ह्रदय गति रुक जाने के कारण देहांत हो गया| कल रात ही सोशल मीडिया पर उनके देहांत की ख़बर पूरे विश्व में आग की तरह फैल गई| नईयर सिरसिवि के भांजे मारूफ सिरसिवि के मुताबिक़ वो कल रात अच्छे भले अपने घर पर ही थे और रात का खाना खाने के बाद घर वालों के साथ बैठकर बातचीत करते रहे और उसके बाद वो सोने चले गए | देर रात उनके सीने में दर्द उठा , इससे पहले कि उन्हें अस्पताल ले जाया जाता उनका घर पर ही देहांत हो गया, वो 65 वर्ष के थे|
बताते चलें कि वो एक बेहतरीन शायर के अलावा बेहतरीन इंसान भी थे| लोग जहाँ उनकी शायरी से आकर्षित थे वहीं उनके स्वभाव ने भी लोगों के दिलों में एक ख़ास जगह बना ली थी | कल रात अचानक हुए उनके निधन से उनके चाहने वालों में शोक व्याप्त है | नईयर सिरसिवि को आज सुपुर्दे ख़ाक किया गया | इस अवसर पर हज़ारों की संख्या में लोगों ने उनके जनाज़े में शिरकत की| वैसे तो नईयर सिरसिवि के अलावा भी सिरसी के शायरों ने सिरसी का नाम दुनिया भर में रौशन किया है और इस दौर के शायर भी ये सिलसिला क़ायम किये हुए हैं, हालाँकि मरहूम की बात ही अलग थी |
यहाँ हम उनके कुछ शेर आप लोगों की खिदमत में पेश कर रहे हैं|
एक सन्नाटा सा होगा हर्श के बाज़ार में|
हम अगर कह दें हमें आंसू की क़ीमत चाहिए||

उन्होंने इस शेर में ये बताने की कोशिश की हैं कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स) पर आंसू बहाने का क्या मर्तबा है| उन्होंने इस शेर में बताया है कि एक आंसू का कतरा भी, जो कर्बला वालों के ग़म में निकले उसकी क़ीमत देने की हैसियत किसी की भी नहीं है|
उनके दो शेर और याद आ रहे है जो बड़े मक़बूल है |
अली के नाम का चर्चा बहुत है |
मुसलमां भी मगर बहरा बहुत है ||
न लग जाये नज़र असग़र को मौला |||
तुम्हारा लाडला हस्ता बहुत है ||||
उनके इस तरह के लाखों कलाम लोगों को ज़बानी याद है, ये अलग बात है कि वो इस दुनिया से मुन्तक़िल हो गए है लेकिन ज़माना ता क़यामत उनको याद रखेगा | यहाँ पर मैं भी एक अपना शेर आप लोगों की खिदमत में पेश करने की जसारत कर रहा हूँ |
मुन्तक़िल खुल्द में कर देगी अली की उल्फत |
ये ग़लत है हमें मौत आएगी मर जायेगे ||
क्युकि अली का इश्क़ इंसान को मरने नहीं देता, इसीलिए नईयर सिरसिवि मौत को गले लगाने के बाद भी हमेशा ज़िंदा रहेंगे |
आखिर में मरहूम के चार मिसरे और याद आ रहे है जिसे आपके हवाले कर रहा हूँ |
नादे अली का विर्द करों ये ग़म-वम, डर-वर क्या |
नादे अली के सामने सारे मंतर-वंतर क्या ||
मदहा सराई में हैदर की ख़ातिर है जिबरील |||
मदहा सराई में हैदर की नईयर-वईयर क्या ||||
बहरहाल नईयर सिरसिवि के निधन से जो शायरी के जगत में हानि हुई है उसकी भरपाई कर पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नमुमकिन है | |

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