Home Article भारत को समझना होगा ,लातों के भूत बातों से नहीं मानते

भारत को समझना होगा ,लातों के भूत बातों से नहीं मानते

ज़की भारतीय

लखनऊ | सीमा विवाद को लेकर गत दिनो पूर्व लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए ख़ूनी संघर्ष के बाद कई भारतीय सेना के जवान शहीद हुए ,हालाँकि चीन के भी कई सैनिकों के मारे जाने की खबर प्रकाश में आई थी ,लेकिन इसकी पुष्टि चीन ने अभी तक नहीं की है | बहरहाल भारत के लगभग 20 सैनिकों के मारे जाने के उपरान्त भी भारत ने विवेक से काम लेते हुए चीन से ऐसे समय में भी बातचीत द्वारा ज़मीनी विवाद सुलझाने का भरसक प्यास किया और आशा है कि भारत अभी और वार्ता का सिलसिला जारी रखे | लेकिन यहाँ पर आपकी खदमत में एक शेर |

झुककर सलाम करने में क्या हर्ज है मगर |
सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े | |

अर्थात बातचीत से कोई भी उलझा हुआ प्रकरण सुलझ सकता है लेकिन बातचीत अगर आपकी तरफ से ही जारी रहे और समझौते की बात सिर्फ आप ही करते रहें तो आपका विरोधी आपको कमज़ोर समझने लगेगा और आपकी प्रतिष्ठा खत्म हो जाएगी | इसलिए भारत की ओर से अब सेना के उच्चाधिकारियों को चाहिए कि बातचीत का सिलसिला बंद कर दें और चीन जिस भाषा में बात करना चाहे उसे उसी भाषा में उत्तर दिया जाए तो उचित रहेगा | क्योंकि लद्दाख के गलवन में 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी और इसमें हमारे देश के 20 जवान शहीद हो गए थे |
चीन और भारत के मेजर जनरल ने गलवान विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बैठक की | यह बैठक लगभग 6 घंटे तक जारी रही | इसमें किस मुद्दे पर बात हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आ सकी | हालाँकि इससे पहले बुधवार को हुई बातचीत में भी दोनों देशों के अफसरों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई थी | बात थोड़ी कड़वी है लेकिन इस बात से कोई मुंह मोड़ नहीं सकता ,आप जानना ज़रूर चाहेंगे कि कौन सी कड़वी बात ? तो मैं एक बात देश के नागरिकों से पूछना चाहूंगा कि अगर यही हरकत हमारे पडोसी दुश्मन पकिस्तान ने की होती तो क्या इसी तरह से बातचीत जारी होती ? यक़ीन मानिये ट्वीटर से लेकर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इतना यूरिन बहा दिया गया होता कि पकिस्तान बह चूका होता | कट्टरपंथी संघटनोँ के पदाधिकारी कह रहे होते कि अगर एक एक टीप भी मार देंगे तो किसी पाकिस्तानी के सर पर बाल नहीं मिलेंगे | लेकिन यहाँ मामला बातचीत से सुलझाने का प्रयास चल रहा है,जबकि उधर आंतकवाद के मामले पर पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री हमारे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से वार्ता करने के इक्षुक रहे लेकिन हमारे प्रधानमंत्री ने किसी सेना केअधिकारी को भी बातचीत के लिए नहीं भेजा ,हम जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्यों ?
हो सकता है कि कोई कहे कि इस समय मामला चल रहा है भारत और चीन का और ये पाकिस्तान की बात निकाल कर बैठ गए | इस समय पकिस्तान की बात करना ज़रूरी थी और इसीलिए पकिस्तान की बात की है | भारत को कूटनीति के अनुसार पकिस्तान को ही नहीं हर उस देश से अच्छा रिश्ता बनाकर रखना चाहिए जो बुरे समय में काम आ सके | आज चीन ने नेपाल और पाकिस्तान को अपना मित्र बना रखा है ,जिस कारण उसका दिमाग खराब हो रहा है |आज अगर चीन पकिस्तान और नेपाल की धरती का इस्तेमाल कर सकता है ,तो भारत भी कर सकता था लेकिन भारत ने कूटनीति से काम नहीं लिया | भारत को चाहिए कि वो अमेरिकन पालिसी को समझे और उसके कूटनीतिक पदचिन्हों पर चले | बहरहाल भारत को चाहिए कि चीन से अब बात करना ख़त्म करे और उसे बता दे कि हम अपने एक सैनिक की शहादत पर शत्रु की 100 लाशों को ज़मीन पर गिराने की हिम्मत रखते हैं |
बहरहाल जो ख़बरें अब आ रही हैं उससे ये महसूस होता है कि ये बात हमारे भारत की समझ में आ रही है | सूत्रों ने बताया कि 18 जवान लेह और 58 सैनिक दूसरे अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से सभी की स्थिति अब स्थिर है। सूत्रों ने कहा कि लेह के 18 जवान 15 दिन में ड्यूटी पर आ जाएंगे। अन्य अस्पतालों में भर्ती जवानों को ड्यूटी पर लौटने में महज एक हफ्ते का वक्त लगेगा। उधर, सेना ने यह भी कहा था कि कोई भी जवान लापता नहीं है। इस बीच भारतीय वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया दो दिनों के दौरे पर लेह पहुंचे हैं | यहां उनके द्वारा लेह और श्रीनगर के एयरबेस की समीक्षा की गई | यह दोनों ही एयरबेस हर लिहाज से किसी भी ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं | वहीं, इस दौरे के साथ ही भारतीय लड़ाकू जेट आगे के हवाई क्षेत्रों में भेजे गए हैं | और अब सेना प्रमुख का बातचीत के बीच लेह और कश्मीर का दौरा अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह इस दौरे के दौरान भारत के सैन्य ठिकानों का जायजा लेंगे। यही कारण है कि उनके दौरे के साथ ही लड़ाकू विमान भी बॉडर्र के नजदीक एयरबेस पर तैनात किए जा रहे हैं |
सूत्रों कि मानें तो ‘वायु सेना प्रमुख दो दिवसीय यात्रा पर थे, जहां उन्होंने पूर्वी लद्दाख में LAC के साथ चीनी आक्रमण के मद्देनजर उन सभी प्लेटफार्मों की परिचालन तत्परता की जांच की, जहां 10,000 से अधिक सैनिकों को चीन द्वारा एकत्र किया गया है। सूत्रों ने बताया कि अपनी यात्रा के पहले दिन चीफ 17 जून को लेह में थे और वहां से वे 18 जून को श्रीनगर एयरबेस गए थे | ये दोनों ठिकाने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के सबसे करीब हैं और पहाड़ी इलाके में किसी भी लड़ाकू विमान के संचालन के लिए सबसे अनुकूल हैं और चीनी पर भी साफ़ नजर रखते हैं | इस बीच, वायु सेना ने सुखोई -30 एमकेआई, मिराज 2000 और जगुआर लड़ाकू विमान बेड़े सहित अपने महत्वपूर्ण सामानों को उन्नत पदों पर स्थानांतरित कर दिया है जहां वे बहुत कम समय में उड़ान भर सकते हैं |
पूर्वी लद्दाख सेक्टर में भारतीय सेना के जवानों को हवाई सहायता प्रदान करने के लिए, अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टरों को उन क्षेत्रों के करीब के क्षेत्र में तैनात किया गया है, जहां जमीनी सैनिकों द्वारा कार्रवाई की जा रही है | चिनूक हेलिकॉप्टरों को लेह एयरबेस में और उसके आसपास तेजी से सेना के परिवहन और अंतर-घाटी टुकड़ी हस्तांतरण की क्षमता प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है, अगर ऐसी स्थिति वहां उत्पन्न होती है तो Mi-17V5 मध्यम-लिफ्ट हेलिकॉप्टर भी सैनिकों और सामग्री परिवहन के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं |

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