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ताजमहल के बंद 22 कमरों में हैं देवी या देवताओं की मूर्तियां

लखनऊ । अयोध्या में बाबरी मस्जिद को कार सेवकों द्वारा गिराए जाने और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसे राम जन्म स्थल मानकर हिंदू संप्रदाय की आस्था बताते हुए दिए जाने के बाद से अब मुसलमानों की कई मस्जिदें हिंदू संगठनों के निशाने पर आती जा रही है। यही नहीं अब ताजमहल पर भी कुछ संघटनों की नज़रे जम चुकी है। अब इस मामले को लेकर माँग की जा रही है, ताजमहल परिसर में एक बंद कमरे को खुलवाया जाए क्योंकि उसमें भगवान की मूर्तियाँ रखी हैं। समझ से परे बात ये है कि आखिर बंद कमरे में रखी मूर्तियों की जानकारी दावा करने वालों को वर्षों बाद कैसे हुई?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में विवादित ढांचे पर दिए गए फैसले पर कुछ कहना इसलिए अनुचित होगा, क्योंकि उस विवादित स्थल का फैसला भारत की शीर्ष अदालत ने किया है। लेकिन अब एक के बाद एक मस्जिदों में मंदिर बनाया जाना और ऐतिहासिक स्थलों को निशाना बनाकर उस पर मंदिर स्थापित किया जाना दरअस्ल आस्था का विषय नहीं बल्कि हिंदू मुस्लिम को एक दूसरे से दूर करने का प्रकरण नजर आ रहा है। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के मामले की सुनवाई के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में शाही मस्जिद का मामला भी काफी गरम है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी शाही मस्जिद को हटाने के मामले में मंगलवार को एक वकील के देहांत के कारण सुनवाई स्थगित कर दी गयी है। उधर ताजमहल से जुड़े 12 कमरों को खाली कराने संबंधी याचिका पर भी सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में 12 मई को अदालत बैठेगी। मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर से सटी शाही मस्जिद ईदगाह को हटाने के मामले में जिला अदालत में मंगलवार की सुनवाई को स्थगित कर दिया गया है। इस केस की सिविल जज सीनियर डिविजन के कोर्ट में सुनवाई होनी थी। ज्ञानवापी परिसर की तरह मथुरा में भी जहाँ कमिश्नर नियुक्त कर सर्वे कराने को लेकर अदालत में सुनवाई थी वहीँ एक और वाद पर भी सुनवाई होनी थी, जिसमें यहां के श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह को हटाकर पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की गई है। दोनों याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार केशव देव मंदिर से संबंधित जो भी साक्ष्य हैं, वो मिटाए जा रहे हैं।

आज श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आगरा से जुड़े मामलों की सुनवाई जहाँ तो टल गई वहीँ, ज्ञानवापी मामले में बहस हुई।
उधर, काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवाद में मंगलवार को सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में करीब डेढ घंटे तक बहस जारी रही। इस दौरान वादी और प्रतिवादी की ओर से कोर्ट कमिश्नर को बदलने, मस्जिद के भीतर सर्वे की इजाजत देने का ममला उठा। दोनों पक्षों की ओर से वकीलों ने अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत किया। बहस के दौरान प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने कुछ अन्य तथ्य प्रस्तुत करने के लिए बुधवार तक की मोहलत मांगी जिस पर अदालत ने 11 मई तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है।

इस बीच आगरा के ताजमहल के 22 कमरों को खुलवाने की मांग वाली अयोध्या के भाजपा नेता की याचिका पर मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई नहीं हो सकी। वकीलों की हड़ताल के कारण अब इस मामले में सुनवाई 12 मई को होगी।
भाजपा के मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने ताजमहल का सर्वे कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि ताजमहल के बंद पड़े 22 कमरों को खुलवा कर सरकार की तरफ से फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित हो, जो कि वहां पर जांच करे कि क्या वहां पर बंद पड़े कमरों में देवी या देवताओं की मूर्तियां हैं। ताजमहल का सर्वे तथा वीडियोग्राफी की जाए। जिससे कि सत्यता सामने आ सके। याचिका में यह भी मांग की गई है कि आगरा के ताज महल, फतेहपुर सीकरी, आगरा लाल किला, अथमदुल्ला और अन्य स्मारकों को प्राचीन व ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातत्व स्थलों और अवशेष (राष्ट्रीय महत्व की घोषणा) अधिनियम 1951 के प्रावधानों के तहत ऐतिहासिक स्मारकों के रूप में घोषित करने से संबंधित प्रावधान और प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 को भारत के संविधान के खिलाफ घोषित किया जाना चाहिए और तदनुसार उन्हें अलग रखा जाना चाहिए।

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