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जिस शाख पर बैठे हो वही काट रहे हो

भूकंप से आज फिर दहली दिल्ली ,घरों को छोड़कर लोगो का सड़क पर जमावड़ा

ज़की भारतीय

लखनऊ संवाददाता | ईश्वर की प्रकृति से छेड़छाड़ आज नहीं तो कल पूरे संसार को ले डूबेगी,जब कोई ऐसा रास्ता न होगा कि मनुष्य उस भयावह स्थित से निपटने में सफल हो सके ,क्योंकि हम अपने आराम और कम्पटीशन के इस युग में मानसिक रूप से बीमार होते जा रहे हैं | कारण है एक दूसरे से तुलना ,अगर आप का घर क़ीमती पत्थरों से बना है तो मेरा घर उन क़ीमती पत्थरों से क्यों न बने ? आपके घरों में अगर सागौन की लकड़ी के दरवाज़े खिड़किया हैं तो हम क्यों पीछे रहें ? आप के घर में यदि बोरिंग है तो हम क्यों सप्लाई का पानी पियें ? आप अगर अपनी कार और मोटरसाइकिल से चल कर प्रदुषण फैला सकते हैं तो हम क्यों नहीं ? इसी प्रकार की ढेरों बातें धीरे- धीरे हमें विनाश की ओर ले जा रही हैं | कभी मनुष्य ने ये सोचा है की विश्व की धरती एक सामान कईं नहीं है ? सूरज जब हमारे सामने से ओझल होता है तो वो दूसरे देश में कैसे निकलता है ? आखिर ऐसा क्यों होता है ? क्या कभी इसपर गौर किया जाता है ? एकसाथ सभी का उत्तर होगा ,नहीं | काठगोदाम निचली सतह पर क्यूँ और नैनीताल उचाई पर क्यों ? जम्मू ज़मीनी सतह पर क्यों और श्रीनगर ,पहलगाओं ,गुलमर्ग और सोनमर्ग बलन्दी पर क्यों ? जब मनुष्य इन सब बिंदुओं पर विचार करे तो उसकी समझ में आएगा कि आखिर मौसम में बदलाव क्यों होने लगा है ,मई शुरू हो चुका है और ठण्ड भी हो जाती है ,बारिश भी होने लगती है | अधिक ठण्ड पड़ना बंद हो चुकी है ,अब गर्मी भी भीषण रूप धारण कर चुकी है | हालाँकि किसी शायर ने कहा है की ”किसने जाना है बदलते हुए मौसम का मिज़ाज ”| लेकिन इस सबका कारण हम हैं और कोई नहीं | मुसलमानों के पवित्र ग्रन्थ क़ुरआन में लिखा है कि ईश्वर ने ज़मीन के बैलेंस को बनाए रखने के लिए पहाड़ों की मेख़ ज़मीनों में थोक दी हैं ,लेकिन पहाड़ों को काटकर उन पत्थरों से हमारे घरों को सजाया जा रहा है ,सड़कों का निर्माण हो रहा है है और ऐसी स्थित में भूमि आज नहीं तो कल अपना संतुलन खो देगी और हम सब भूमि के अंदर समां जाएंगे | आप भी सोच रहे होंगें की ये कहना क्या चाह रहे हैं, तो हम बताते चले की अपनी या आने वाले हमात्रे वंशजों को ज़िन्दगी देने के लिए हम अभी से सुधर जाएं वरना जिस शाख पर बैठे हो वही काट रहे हो | आज कल जो भूकंप के आने में तेज़ी है वो थमने का नाम नहीं लेगी | आज एक बार फिर दिल्ली में दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.5 मैग्नीट्यूड मापी गई है| भूकंप के झटके लगते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप का ज़्यादातर असर पूर्वी दिल्ली रहा।
दरअसल, मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के लिहाज से भारत को कुल 5 जोन में बांटा गया है, जिनमें दिल्ली जोन 4 में है और यह खतरनाक माना जाता है। कुल 5 जोन में से जोन 2 को सबसे कम संवेदनशील की श्रेणी में माना जाता है, जबकि जोन-5 ऐसा क्षेत्र है, जहां पर सबसे ज्यादा भूकंप आने की आशंका रहती है।

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