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जब रूस के आगे झुकने ही था, तो क्यों अपने देश को तबाही की ओर ढकेला

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के सामने घुटने टेकने के दिए संकेत

ज़की भारती

लखनऊ। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के सामने घुटने टेकने के संकेत दे दिए हैं। कल तक जो नेटो को लेकर अपने रवैया पर अड़े हुए थे आज उन्होंने नेटो को लेकर बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह नेटो में शामिल होने की अपनी मंशा को बहुत पीछे छोड़ आए हैं । उनको ये बयान इसलिए देना पड़ा है क्योंकि इसमें शामिल देश रूस के साथ टकराव से डर रहे हैं। यही वजह है कि वो अब रूस के सामने ज़्यादा देर तक नहीं टिकने वाले हैं। यही नहीं वो
दो अलगाववादी क्षेत्रों पर समझौते के लिए भी तैयार हो गये हैं । रूस के आक्रामक होने के कारण अब यूक्रेन नेटो में शामिल होने की इच्छा का दम घोट चुका हैं।
जेलेंस्की ने अमेरिका के एक टीवी चैनल को सोमवार रात दिए एक साक्षात्कार में ये बातें कहीं हैं। उन्होंने ने पुतिन और रूस द्वारा मान्यता दिए गए यूक्रेन के क्षेत्रों पर खुलकर बात की । उनके इस इंटरव्यू से लगता है कि अब जेलेंस्की रूस के सामने घुटने टेकने ही वाले हैं।
उन्होंने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि मुझे इस दौरान समझ में आ गया है कि नेटो नहीं चाहता कि यूक्रेन भी इस गठबंधन में शामिल हो।
यूक्रेन के नेटो में शामिल होने पर स्थिति को स्पष्ट करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि वो एक ऐसे देश के राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते जो घुटनों पर गिरकर भीख मांगता है।

रूस की शर्तें मानने को तैयार है यूक्रेन

रूस की मानें तो उसका कहना है कि उनकी कुछ मांगें हैं जिन्हें यूक्रेन मान लेता तो यूक्रेन के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई ना होती। आज भी रूस चाहता है कि यूक्रेन उनकी कुछ बातें मान ले तो बिना देर किए सैन्य कार्यवाही रुक दी जाय। रूस ने कहा है कि यूक्रेन अपने संविधान में बदलाव करके ये स्पष्ट करे कि वो किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा और यूक्रेन 2014 में रूस में शामिल अपने हिस्से क्रीमिया को रूसी क्षेत्र की मान्यता दे । यही नहीं दोनेत्स्क और लुहांस्क की स्वतंत्र क्षेत्र की स्थिति को भी मान्यता दे।

नेटो सोवियत रूस से मुकाबला करने के लिए 1949 में बना था

नेटो सोवियत रूस से मुकाबला करने के लिए वर्ष 1949 में बना था। जबकि 1991 में सोवियत रूस के विघटन के बाद नेटो ने रूस के आसपास के कई और देशों को भी गठबंधन में शामिल कर लिया था जिससे रूस की नाराजगी बढ़ गई थी।
वर्ष 2008 में नेटो यूक्रेन को भी गठंधन का हिस्सा बना रहा था लेकिन ऐसा हो नहीं सका और अब ऐसा कहा जाने लगा था कि यूक्रेन जल्द ही नेटो का सदस्य बनने वाला है,जिसे लेकर रूस की नाराजगी बढ़ी और उसने और कई कारणों का हवाला देते हुए यूक्रेन पर हमला कर दिया ।

जेलेंस्की और दोनेत्स्क पर रूस की बात मानने को तैयार हैं यूक्रेन के राष्ट्रपति

जब जेलेंस्की से दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं ।
उन्होंने कहा कि मैं सुरक्षा की गारंटी के बारे में बात कर रहा हूं। रूस के अलावा किसी अन्य देश ने इन छद्म देशों को मान्यता नहीं दी है,लेकिन हम इस पर बातचीत कर सकते हैं । उन्होंने कहा कि हम इस बात पर समझौता कर सकते हैं कि ये दोनों क्षेत्र आने वाले समय में कैसे रहेंगे ।
उन्होंने आगे कहा कि मेरे लिए ये महत्वपूर्ण है कि उन क्षेत्रों के वो लोग कैसे रहेंगे जो यूक्रेन का हिस्सा बनकर ही रहना चाहते हैं।

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