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आलमनगर स्थित वक़्फ़ सज्जादिया की शिया कालोनी विवाद का किया हुसैनी टाइगर्स नें निबटारा

लखनऊ,संवाददाता। लखनऊ के आलमनगर स्थित शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आने वाली वक्फ सज्जादिया कालोनी में अनुचित ढंग से अलॉटमेंट के निरस्तीकरण का प्रकरण तूल पकड़ता जा रहा था। अभी तक ये प्रकरण जहाँ सिर्फ शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद नक़वी के संज्ञान में आया था वहीं पीड़ितों नें अपने साथ हो रही नाइंसाफी की शिकायत शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष अली ज़ैदी से भी की थी। पीड़ितों के अनुसार शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी ने उनकी सुनवाई करते हुए जहाँ तुरंत अवैध रूप से हो रहे काम को रुकवाया और जांच के आदेश दिए वहीं सबको न्याय दिलवाए जाने का आश्वासन भी दिया था।
जिसके बाद मौलाना कल्बे जव्वाद नक़वी के आदेश पर हुसैनी टाइगर्स के संस्थापक शमील शम्सी ने अपने स्तर से जाँच की और उलझे हुए प्रकरण को आसानी से सुलझा लिया।

बताते चलें , उक्त वक़्फ़ समपत्ति को धर्मगुरु कल्बे जव्वाद नक़वी ने पात्र व्यक्तियों,”जो निर्धन एवं ज़रूरतमंद थे” उनको बसाए जाने हेतु वर्ष 2006 में कुछ शर्तों के तहत दी थी। जिसके नाम भी भूमि आवंटित की गई थी उससे एक अनुबन्ध भी किया गया था। अनुबंध में 3 माह के भीतर आवंटित जमीन पर भवन का निर्माण करना, प्रति माह 60 से 100 रूपये किराया दिया जाना एवं आवंटित संपत्ति को किराये या आर्थिक वृद्धि हेतु उपयोग न किया जाना शामिल है। अनुबंध के अनुसार 300 वर्गफिट का 60/-रुपए प्रतिमाह एवं 500 वर्गफिट का 100/- रुपए प्रतिमाह किराया निर्धारित किया गया था। इस अनुबंध में लिखा है कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है तो मुतवल्ली को अधिकार होगा कि वो आवंटन रद्द कर दे।

सूत्र बताते हैं कि पीड़ितों पर आरोप था कि उनके द्वारा प्लाटों को अवैध रूप से 5 -6 लाख रूपयों मे क्रय-विक्रय किया जा रहा है। अगर ये आरोप सत्य है तो इसके साक्ष्य किसके पास थे ? क्या किसी के सिर्फ आरोप लगाने भर से किसी को उजाड़ जाना उचित था ? शायद यही सोच कर शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद नक़वी ने दूसरों की बात पर यकीन न करते हुए इस पूरे मामले की जाँच हुसैनी टाइगर्स के संस्थापक शमील शम्सी को दी। कल शमील शम्सी हुसैनी टाइगर्स के सदस्यों के साथ आलमनगर पहुचे और मामले की निष्पक्ष जाँच की। उन्होने कल ही पीड़ितों को कुछ शर्तों के तहत यक़ीन दिला दिया था कि जिनके अनुबंध निरस्त किये गए हैं उनको पुनः उनके पप्लाट अथवा भवन वापिस कर दिए जाएंगे।
सूत्र बतातें हैं कि जिनं फ़र्ज़ी आरोपों को आधार बनाकर लगभग 32 आवंटन रद्द किये गए थे वो निरस्त नहीं माने जाएंगे।
हालांकि पीड़ितों का इस पूरे मामले पर कहना है कि मुतवल्ली कल्बे जव्वाद नक़वी के कुछ ऐसे लोग थे जिन्होंने उन्हें गुमराह करके किसी लालच के तहत उनसे गरीबों के विरुद्ध कार्यवाही करवाई थी। बहरहाल ख़बर लिखे जाने तक उत्पीडित निर्धन किरायदारों को न्याय दिलवाने के लिए मौलाना कल्बे जव्वाद नक़वी सख़्त नज़र आ रहे हैं।

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