HomeWORLDअब अल्ट्रासाउंड की मदद से पता चलेगा हृदयाघात का खतरा

अब अल्ट्रासाउंड की मदद से पता चलेगा हृदयाघात का खतरा

लखनऊ, संवाददाता | हृदयाघात को रोकने के लिए तमाम जांचों से छुटकारा पाने के लिए अब अल्ट्रासाउंड एक ऐसा माध्यम बनकर सामने उभर रहा है जिसके माध्यम से हृदयाघात का खतरा रोका जा सकता है | एक ताजा अध्ययन में कहा गया है कि हृदयाघात रोकने के लिए ऑपरेशन केवल कुछ स्थितियों में ही फायदेमंद होता है | ऐसे में अल्ट्रासाउंड अनावश्यक ऑपरेशन को रोकने में उपयोगी साबित हो सकता है | स्वीडन की उमेआ यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ता फिसनिक जाशरी के अनुसार अल्ट्रासाउंड की मदद से हम उन मरीजों का पता लगा सकते हैं जिन्हें हृदयाघात का खतरा सर्वाधिक है | ऐसे में जहां जरूरत नहीं होगी वहां ऑपरेशन नहीं किया जाएगा | वैज्ञानिकों के अनुसार आधे से ज्यादा हृदयाघात एथेरोस्कलेरॉसिस के कारण होते हैं । जिस में धमनिया साफ हो जाती हैं ,यह एक सूजन पैदा करने वाली बीमारी है ,जो मस्तिष्क, हृदय और शरीर के अंगों में ऑक्सीजन युक्त व्रत के संचालन को प्रभावित कर देती है | इस अवस्था में मस्तिष्क सहित अन्य अंगों में रक्त की आपूर्ति बाधित होती है और गर्दन की नसों में भी आघात का सबसे बड़ा कारण एथेरोस्कलेरॉसिस है, इसकी सबसे खतरनाक अवस्था करॉटिड स्टेनोसिस है, जो बुजुर्गों के साथ मोटापा, उच्च रक्तचाप व मधुमेह ग्रस्त लोगों में काफी देखी जाती है | एथेरोस्कलेरॉसिस रोग पर नियंत्रण कोलोस्ट्राल कम करने वाली दवाइयों के अलावा ऑपरेशन से किया जाता है | यह अल्ट्रासाउंड विधि एथेरोस्कलेरॉसिस रोग की प्रकृति प्ले की अधिकता का आकलन करने में मददगार होने के साथ ही रोगियों के लिए रेडियस फ्री सस्ती और बेहतर है | जाशरी ने बताया हम जानते हैं कि करॉटिड स्टेनोसिस में ऑपरेशन कुछ ही लोगों के लिए फायदेमंद होता है | बाक़ी लोग मेडिकल थेरेपी से ठीक हो सकते हैं ,ऐसे मरीजों के इलाज में अल्ट्रासाउंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है |

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